Friday, 12 April 2013

Meri Baat Kya


यूं तो चाँद भी भटकता है रात भर ,
          मैं जो भटक गया तो बात क्या ,

सारी दुनिया रोती है चुप कर ,
          मैं जो थोड़ा रो लिया तो बात क्या ,

हर किसी को तलब है प्यार की ,
          मैंने थोड़ा सोच लिया तो बात क्या ,

रोश्नी की चाह तो सब को है ,
          मैंने थोड़ा अंधेरा मांग लिया तो बात क्या ,

ज़िंदगी के इस हसीन ख्वाब में ,
          मैंने उसे मांग लिया तो बात क्या ,

हर किसी ने महफिल को चाहा यहाँ ,
          मैंने तनहाई को चाहा तो बात क्या ,

यूं तो चाँद भी भटकता है रात भर ,
          मैं जो भटक गया तो बात क्या ।। 

                                                        --- My Friend हिमांशु झाड़ी 

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