यूं तो चाँद भी भटकता है रात भर ,
मैं जो भटक गया तो बात क्या ,
सारी दुनिया रोती है चुप कर ,
मैं जो थोड़ा रो लिया तो बात क्या ,
हर किसी को तलब है प्यार की ,
मैंने थोड़ा सोच लिया तो बात क्या ,
रोश्नी की चाह तो सब को है ,
मैंने थोड़ा अंधेरा मांग लिया तो बात क्या ,
ज़िंदगी के इस हसीन ख्वाब में ,
मैंने उसे मांग लिया तो बात क्या ,
हर किसी ने महफिल को चाहा यहाँ ,
मैंने तनहाई को चाहा तो बात क्या ,
यूं तो चाँद भी भटकता है रात भर ,
मैं जो भटक गया तो बात क्या ।।
--- My Friend हिमांशु झाड़ी
No comments:
Post a Comment